क्या राजपाल यादव बनेंगे अमिताभ बच्चन ? इस सवाल का जवाब जानने के लिए पूरा मामला पढ़ा जाना चाहिए।
मशहूर फ़िल्म अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के एक मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने सीधा तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने को कहा है। राजपाल यादव ने कोर्ट की बात मानते हुए बीते दिन तिहाड़ जेल में जाकर सरेंडर कर दिया है । सोशल मीडिया पर राजपाल को लेकर एक बहस सी छिड़ गई। तमाम-तमाम पोस्ट्स, विडियोज उनके फेवर में लिखे जाने लगे, तमाम तो उनके विरुद्ध भी। दरअसल साल 2012 में राजपाल यादव ने एक फ़िल्म निर्माण करने के अपने पुराने सपने को साकार करना चाहा था। उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी से 5 करोड़ रुपए उधार लेकर फ़िल्म “अता पता लापता” का निर्माण किया था। जो कि पर्दे पर डिजास्टर साबित हुई। यूं ही नहीं दिखते हैं मन से देखे गए सपने । अक्सर मन के सपनों को आंखों से देखने के लिए मर मर कर जीना पड़ता है । राजपाल के साथ भी यही हुआ। फ़िल्म फ्लॉप हुई तो हौसले चकनाचूर हो गए। फ़िर सपनों को साइड कर दिया। काम में लग गए ताकि आजीविका के लाले न पड़ जाएं। उधर कर्ज़ की रक़म बढ़ती रही। मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा। राजपाल ने जो चेक दिए थे वे बाउंस हो गए। राजपाल यादव ने कई बार कोर्ट से मौक़ा (समय) मांगा, और वादा किया कि जल्द ही कर्ज़ की रक़म चुका दी जाएगी। मगर न जाने किन कारणों से हर बार वादा खिलाफ़ी करते रहे। कर्ज़ की रकम बढ़कर 9 करोड़ पहुंच गई। कोर्ट ने इस बार राजपाल को कर्ज़दार होने से भी अधिक कोर्ट की अवमानना का दोषी मानते हुए अभिनेता को तिहाड़ जेल में समर्पण करवा दिया। मग़र बता दूं राजपाल को जेल जाने से कर्ज़ चुकाने में कोई रियायत नहीं मिलने जा रही, उन्हें अब भी शत प्रतिशत कर्ज़ चुकाना होगा।
अभिनेता राजपाल के विषय में तमाम लोगों की जिज्ञासा है कि क्या फ़िल्म अभिनेता इतना भी नहीं कमा पाते कि वे अपना कर्ज़ चुका सकें ?! या फ़िर वे जान बूझकर चुकाना नहीं चाहते !? या राजपाल अपनी नज़र में इस फंड को कर्ज़ नहीं मानते बल्कि इसे उस कंपनी का इनवेस्टमेंट मानते हैं । जिसने लाभ में साझेदार की नियत से इन्वेस्ट किया था !?
राज पाल यादव पर themmtalkies की नज़र
साल २००९ में विविध भारती के किसी शो में राजपाल यादव का साक्षात्कार प्रसारित किया गया था . उसमें राजपाल को भाग्यशाली बताया गया कि छोटा कद और बॉलीवुड सरीखी फ़िल्म इंडस्ट्री में इतना ढेर सारा काम, चमत्कार ही है. इस पर राजपाल जी ने बीच में टोकते हुए कहा कि जिनके हाथ नहीं होते क्या उनके भाग्य नहीं होते !? मैं कर्म करता हूँ फ़ल की इच्छा कृष्ण जी पर छोड़ देता हूँ. यह सुनकर मैं उन दिनों बहुत प्रभावित हुआ था। राजपाल यादव एक उम्दा कलाकार हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, स्क्रीन प्रेजेंस और रिएक्शनस् वेरी नेचुरल होते हैं । राजपाल यादव अवधी भाषी क्षेत्र शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। उनकी संवाद अदायगी और भाव भंगिमाओं में अवध का देशीपन साफ़ दिखाई पड़ता है। राजपाल यादव आध्यात्मिक व्यक्तित्व के संपन्न हैं। उनके धार्मिक गुरु स्वर्गीय देवप्रभाकर शास्त्री दद्दा जी के संगम क्षेत्र में लगते पंडालों में मैं भी अक्सर जाया करता था। अभिनेता राजपाल शिव भक्त और सकारात्मक व्यक्ति हैं । और हेल्पिंग मैन भी। The lallantop शो में फ़िल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा था कि उनके संघर्ष के दिनों में जब राजपाल यादव बॉलीवुड में स्थापित अभिनेता बन चुके थे । तब उन्होंने राजपाल यादव को अपने घर पर स्ट्रगलर्स के लिए लंगर लगाते हुए देखा है। फ़िल्म अभिनेता एवं स्टैंडअप कॉमेडियन सुनील पॉल ने भी एक शो में कहा कि राजपाल यादव एक सकारात्मक और आशावादी व्यक्ति हैं । मैने उन्हें सफ़लता की ऊंचाइयां छूते हुए भी देखा है और फ़िल्म “अता पता लापता” के फ्लॉप होने के बाद कर्ज़ में डूबे हुए अभिनेता को बुरी तरह परेशान भी देखा है। सुनील पॉल के अनुसार सेट पर शॉट्स के बीच तमाम बार राजपाल के पास कॉल आया करता था, राजपाल गिड़गिड़ाते थे, परेशान हो जाते थे । काम में मन नहीं लग पाता था । परिणाम ये हुआ कि प्रोड्यूसर्स राजपाल को अपने प्रॉजेक्ट्स में लेने से कतराने लगे । राजपाल कुछ सालों तक फ़िल्मों में कम ही दिखाई पड़ने लगे । काम के टोटे पड़ गए । छोटे छोटे काम मांगने पड़े । अभिनेता का शान ओ शौकत और राजा वाला स्वभाव बुरी तरह प्रभावित होने लगा ।। मुंबई में सर्वाइवल मुश्किल होने लगा । अभिनेता ने कुछ पैसे देकर अपने कर्ज़ लौटाने की कोशिश की लेकिन कंपनी के प्रेशर के आगे ये प्रयास नाकाफी रहा होगा । इंसान जीवन में कभी कभी कोई ऐसा रॉन्ग टर्न ले लेता है कि उसकी यात्रा तो क्या उसका जीवन ही अस्त व्यस्त हो जाता है । दुनिया में कर्ज़ से बुरी बात कोई और हो ही नहीं सकती । कर्ज़ जब ख़ुद्दार आदमी पर हो तब तो यह और भी दुखदाई होता है । क्योंकि ख़ुद्दार आदमी इससे निकलना चाहता है मगर कर्ज़ का दलदल इतना गहरा होता है कि आदमी जितना बचने के वास्ते पांव चलाता है वह और भी फंसता चला जाता है । बैंक ने शाहजहांपुर के मक़ान में ताले जड़ दिए थे । क़र्ज़ वसूलने वालों के इतने बेमौक़ा और बेअदबी से फ़ोन कॉल आना कि काम बुरी तरह प्रभावित हो जाए। दलदल नहीं तो और क्या ही है भला !! एक खुद्दार आदमी आशावादी होता है । उसे भरोसा होता है ख़ुद पर । वह यक़ीन करता है अपने आप पर कि उसे अगर तल्लीनता से मेहनत करने दी जाए तो वह पुनः इस दलदल को सुखाकर यहां डामर रोड निकाल सकता है । मग़र अफ़सोस जब आदमी फाइनेंशियल रूप से टूटता है तब वह फिजिकली नहीं बल्कि मेंटली टूटता है । उस पर किए गए लोगों के भरोसे टूटते हैं। भरोसे जब टूटते हैं तब दबाव का रूप धारण करते हैं और ये दबाव निर्दयता से आदमी के हौसले तोड़ डालने वाले होते हैं। मग़र इंसान एक आश पर जी रहा होता है उसे लगता है मौक़ा दो सब बदल दूंगा मगर भरोसा खोने के बाद मौक़ा ही तो नहीं मिलता ।। फाइनेंस के बाज़ार में आपका इमोशन एक मौक़ा है उन व्यापारियों के लिए, जो आपको हसीन सपने दिखाते हैं, आपके साथ होने की बात करते हैं और आप से व्यापारिक संबंध स्थापित करते हैं । आपकी क्षमताओं पर अपनी पूंजी लगाते हैं लेकिन वे जुआ नहीं खेलते । आपसे कहते हैं कि यह रक़म जो वे दे रहे हैं वह आप पर एहसान है । वे इस बात को बड़ी होशियारी से सामने लाते ही नहीं कि उनकी पूंजी लगाने के पीछे की असली वजह उनका मुनाफा की मंशा है आपका इमोशन नहीं। आपके जिस इमोशन को ट्रिगर करके व्यापार किया जाता है, जब आप फ्लॉप होते हैं तब आपका इमोशन जूते से भी अधिक बेक़द्र चीज़ बन जाती है ।। राजपाल यादव को यक़ीन रहा होगा कि उन्हें अगर मौक़ा दिया जाए तो वह इस दलदल से बग़ैर कुछ बेचे अपनी मेहनत और अपने मेहनताने की रक़म मात्र से बाहर आ जाएंगे । उन्हें अपनी संपत्ति को औने पौने दाम पर बेचना नहीं पड़ेगा ।।अफ़सोस की कर्ज़ में डूबे हुए इंसान को मुश्किल दिनों में जिस चीज़ (मौक़ा) की सबसे बड़ी ज़रूरत होती है उस समय उसे वह बिल्कुल नहीं मिलती ।।
बॉलीवुड में बर्बाद होने वाले कलाकारों, अभिनेताओं, निर्देशकों और निर्माताओं की लम्बी फेहरिस्त है । मग़र बर्बादी से निकलकर लीक पर पहले से अधिक सफ़लता से दौड़ने वाले अमिताभ बच्चन जैसे कुछ प्रेरणादायक लोग भी हैं । अभिताभ बच्चन ने भी एबीसीएल नाम की फ़िल्म निर्माण कंपनी बनाई थी । कंपनी ने लगातार इतने घाटे सहे कि अमिताभ बच्चन पर एक वक्त में लगभग सौ करोड़ का क़र्ज़ चढ़ गया था। उनके बंगले भी बैंक ने ऑलमोस्ट नीलामी ही कर दिया था समझिए। अमिताभ का परिवार बुरी तरह इस विभीषिका से जूझ रहा था। फ़िर अमिताभ के हिस्से आया केबीसी और अमिताभ बच्चन ख़ुद को पुनर्स्थापित करने में कामयाब हुए। अमिताभ बच्चन को समय ने बनाया फ़िर बिगाड़ा और फ़िर पहले से अधिक बनाया ।।
अगर राजपाल यादव सच में कर्ज़ में डूबे हैं और इससे निकलना चाहते हैं तो कर्जदाता कंपनी के मालिक माधव गोपाल अग्रवाल और बाकी सभी फाइनेंसर या देनदारों को इन्हें बिना दबाव का ध्यान रहे बिना दबाव का एक अच्छा मगर निश्चित समय देना चाहिए। और सभी मददगारों को अपने- अपने स्तर से राजपाल को काम दिलाने में मदद करनी चाहिए ताकि अपने काम से कमाकर राजपाल कर्ज़ से मुक्त जीवन जी सकें ।।
और यदि राजपाल यादव की मुसीबतें बनावटी या फ़िल्मी हैं, वह सिर्फ़ क़र्ज़ न चुकाने के बहाने ढूंढ रहे हैं तो ईश्वर उन्हें सदबुद्धि दे कि अभिनेता क़र्ज़ जैसे कुचक्र से बाहर आने के विषय में सोचें । किसी व्यक्ति का पैसा जो उनके पास फंस गया है उसे रिपेमेंट करते हुए इस बला से मुक्ति लें। उस बंदे को भी अपना व्यापार आगे बढ़ाने दें क्योंकि बिजनेस प्रैक्टिकल अप्रोच से चलता है सिर्फ़ दार्शनिक भाषणों से कुछ नहीं होता।