“पिंजर/Pinjar (2003): स्त्री देह मांसल उभारों से अधिक कुछ भी नहीं”

पिंजर/Pinjar

“पिंजर/Pinjar (2003) साल २००३ में निर्देशक चन्द्र प्रकाश द्विवेदी ने एक फिल्म बनाई थी पिंजर/Pinjar ।  फिल्म बनने के लगभग १२ साल बाद जब मैं सन २०१५ में ये फ़िल्म देख सका था। तब मैं फ़िल्म पिंजर से बेइन्तिहाँ इश्क़ कर बैठा था ।  जैसे कोई आशिक़ पहली दफ़ा हुए इश्क़   के एहसासात को सारी दुनिया …

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बॉर्डर की लेगेसी के साथ अन्याय है फ़िल्म बॉर्डर 2, फ़िल्मों में फॉर्मूला से कब ऊबेगा, बॉलीवुड !!

 प्रयागराज (इलाहाबाद) में एक चाय वाला था “मल्हू”। शाम को सभी प्रतियोगी छात्र सब्ज़ी लेने चौराहे  पर आते थे । चाय के शौकीन छात्र मल्हू के यहां इकट्ठा होते थे । मल्हू अंगीठी पर एक गन्दे से भागोने में पानी पहले से चढ़ा कर रखता था, बस छात्रों के ऑर्डर का इंतज़ार होता था जैसे …

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