
हिन्दी हॉरर कॉमेडी के जनक हैं प्रियदर्शन-अक्षय कुमार । इस बात को ज्यादा डिटेल में समझने के लिए हम थोडा सा दिमाग पर ज़ोर डालते हैं। अभी वह दिन बीते अधिक दिन नहीं बीते जब हम सब हिन्दी सिनेप्रेमियों ने स्त्री- 2 नाम की एक हॉरर कॉमेडी को थियेटर में घुस घुस के देखा है । जी हां वही “काटी रात मैंने खेतों में तू आई नई”” वाले गाने से जो सजाई गई थी। जिसमें राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना और अभिषेक बैनर्जी , श्रद्धा कपूर को खेतों में ढूंढते हुए नाच रहे थे। जितने कर्णप्रिय सॉन्ग थे उतने ही कर्णप्रिय बॉक्स ऑफिस के आंकड़े थे। एक बार चले तो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दरअसल हॉरर कॉमेडी जॉनर की इस फ़िल्म की पहली किस्त साल 2018 में आई थी। आते ही हॉरर कॉमेडी जॉनर को आसमान छुआ दिया था। फ़िल्म को निर्देशित किया था अमर कौशिक ने और फ़िल्म निर्माण में भर भर कर पैसा लगाकर निर्माता बने थे दिनेश विजान और राज निदिमोरु और कृष्णा डीके। फ़िल्म स्त्री डी2आर फिल्म्स के सहयोग से मैडॉक फिल्म्स के बैनर के तहत बनाई गई थी। जब यह स्त्री 2 आई थी तब तो इसने कमाई के सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर डाले। इसमें बहुत सी पॉपुलर बातों की तरह अक्षय कुमार का एक कैमियो भी ख़ासा पॉपुलर हुआ था। अक्षय कुमार से याद आया, भले ही हॉरर कॉमेडी के रूप में स्त्री ने पहचान स्थापित करने की एक अच्छी कोशिश की है मग़र इस जॉनर का असली किंग तो अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी ही है। मैं तो कहूंगा कि हिन्दी सिनेमा में हॉरर कॉमेडी के जनक हैं प्रियदर्शन-अक्षय कुमार। इन्होंने ही हॉरर कॉमेडी जॉनर को पहली बार साल 2007 में भुलभुलैया नामक फ़िल्म से इंट्रोड्यूस करवाया था। तब लोग इतने हंसे थे कि हंसते हंसते डर गए थे। और फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भागम भाग मचा दिया था। श्रद्धा ने “वो स्त्री है कुछ भी कर सकती है” कहा ज़रूर है मग़र इस बात को सच साबित 2007 में ही विद्या बालन ने मंजुलिका बनकर कर दिया था। आज भी मंजुलिका और “आमी जे तोमार.” हर भारतीय के दिलों दिमाग में ज़िन्दा है। एक बार दमदार या यूं कहें हूबहू भूलभुलैया वाली स्टारकास्ट के साथ प्रियदर्शन-अक्षय कुमार फ़िल्म भूत बंगला लेकर आ रहे हैं । फ़िल्म की एक झलक दर्शकों के सामने आ चुकी है। दर्शकों का पॉजिटिव रिस्पॉन्स भरभरकर उड़ेला जा रहा है । उम्मीद करते हैं अक्षय कुमार अपने पुराने अंदाज़ में वापिस आ जाएं . अक्षय का २००० दशक वाला औरा दर्शकों की नज़र में अक्षय पर फबता था. उन दिनों अक्षय ने एक से एक बेहतरीन हास्य फ़िल्में दी हैं . जिसमें कुछ फ़िल्में कल्ट क्लासिक दर्ज़ा प्राप्त भी हुयीं. मगर अक्षय में एक खासी कमी है कि अक्षय फ़ॉर्मूला फ़िल्म निर्माताओं को फ़िल्टर नहीं करते. वह इसलिए भी कि अक्षय को भी ज्यादा काम न करना पड़े . उम्मीद करते हैं अक्षय कुमार कॉमेडी के नाम पर ओवर रिएक्टिंग से जल्द ही बाहर निकल जाएं । अगर अक्षय कुमार ने एक्टिंग पर संतुलन बनाकर रखा होगा तो फ़िल्म नेक्स्ट लेवल पर जा कर रुकेगी। यदि वही सेट पैमाने पर सस्ती कॉमेडी चेप दिया होगा तो फ़िर कई सालों की तरह इस फ़िल्म का भी बेड़ा गर्क ही समझो ।।