रुक जा ! चचा रुक जा ! अब और नहीं झेला जायेगा अक्षय कुमार।
इंसान जब अनएक्सपेक्टेड टॉप पर पहुंचता है तब उस मंज़िल का नशा उसके सिर पर चढ़ जाता है। उसकी आँखों से हक़ीक़त दिखाई पड़नी बंद हो जाती है। हमारे अवध में एक कहावत है कि “एक मनई ( मानव) सावन म आंधर भवा रहा ऊका साल भर हरेरिन सूझत रही ।” कहने का अर्थ ये कि एक आदमी सावन में अंधा हुआ था उसे हमेशा हरियाली ही सूझ पड़ती थी। वही हाल आज कल अक्षय कुमार का है। उनको लगता है जैसे पहले ऊल जुलूल कर देते थे, दर्शक उन्हें सिर आंखों पर बैठा लेते थे, आज भी वही नोस्टाल्जिया नाम से करेंगे और दर्शक उन्हें हिट करा देंगे।
लेकिन लेकिन लेकिन …..रुको ज़रा!……. तब अक्षय चाचा आप लगते थे ओरिजिनल ! और अब आप अपनी ही गंदी सी कॉपी करने का शौक़ पाल लिये हैं । चाचा ! ( मैं इसे सिंपल च्चा लिख रहा हूं आप सब मुन्ना भैय्या के अंदाज़ वाला ….चचा पढ़ लीजियेगा .. ) आप जो ये अपनी क्लासिक्स मास्टरपीस का गैंगरेप कर रहे हैं न! इसके लिए आपको हिन्दी दर्शक कभी माफ़ नहीं करेंगे । क्या यार चचा! “टिप टिप बरसा पानी .….” को कूड़ा कर दिये आप । चलिए कैटरीना थीं तो थोड़ा आपको पाप कम लगा उन्होंने सम्हाल लिया, फ़िर आप “भूल भूलैया” का दही कर दिए, अब साला वेलकम में “आलू ले लो..” सरीखे मास्टर सीन को टट्टी बना रहे हो ! दुर्गंध की हद तो तब हो गई जब हमारे बालपन का गाना “इक ऊंचा लंबा क़द.. “ जो हमारे बचपने की याद दिलाता है को आपने बेरहमी से कुछ अन्य सिनेमाई रेपिस्टों के साथ मिलकर उसकी इज्ज़त को तार तार कर दिया। बेशक ये अमर कृतियाँ आपकी अपनी हैं लेकिन हगने के बाद पिछवाड़ा पोछने के लिए इन पन्नों का इस्तेमाल करके आप हमें नेस्टाल्जिया में ले जाने के बजाय हमारी अपनी पसंद, हमारी अपनी शानदार यादों को दिग्भ्रमित करने का काम कर रहे हैं । आपको शायद मालूम नहीं जब आपकी ही कृतियाँ पब्लिक डोमेन का हिस्सा हो जाएँ तो आपकी ही चीज़े पूरी तरह आपकी नहीं रह जातीं । आप मेरे सबसे पसंदीदा 90s के हीरो रहे हैं। भले ही आपने कभी कोई महान रचना नहीं रची है फ़िर भी हम आपकी स्टाइल, आपके जूते, आपके महान एक्शन, आपकी नीली जींस सफ़ेद शर्ट के दीवाने रहे हैं और गोल बड़े काले चश्में के तो पूछिये ही मत … ओ …हो !!
मगर आज! क्या सर !? आप भी न ! मुझे मुन्ना भइया वाला चचा कहने पे मज़बूर कर रहे हैं। आपमें दम बहुत है। बस आपके पास सोचने का दिमाग नहीं है। जैसे संजय दत्त को ड्रग्स के नशे ने घेर लिया था वैसे ही आपको पैसों के नशे ने घेर रखा है। इसीलिए आपको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। मेरी एक सलाह मानिए आप पहले तो ब्रेक लेकर जाइए मेडिटेशन कीजिए। फ़िर जब वापिस आईये तब सबसे पहले अपने स्क्रिप्ट रीडर या स्क्रिप्ट सलाहकार को ससम्मान परमानेंट छुट्टी पर भेज दीजिए ।। फ़िर शुरू करिए एक से एक चूज़ी फ़िल्म । हॉलीवुड लेवल का एक्शन प्राथमिकता में रखकर ज्यादा काम कीजिये क्योंकि जो आपको कॉमेडी लग रहा है न ! वो पहले कॉमेडी था अब आप हमारे इधर वाले “रम्पत हरामी” के लेबल का काम करने लगे हैं, एक दम भोंडा, स्तरहीन। साला भोजपुरी गाना भी चूज किए तो इतना घटिया । कुछ भी ढंग का नहीं हो रहा है आपसे, अब । कॉमेडी तो बिल्कुल ”गू ” , छी ! मुझ जैसे डायहार्ड फैन को आपकी कॉमेडी से घिन आ रही है। धत्त! इतना कचरा किस सनक में फैलाये जा रहे हो यार चचा !
कुछ रोज़ पहले शाहरुख ख़ान को भी अपनी रोमांटिक छवि पर ऐसी ही ग़लतफहमी हुई थी लेकिन वो शाहरुख ख़ान हैं । उन्होंने समय रहते समझ लिया यही अदा उनको शाहरुख ख़ान बनाती है ।। चचा तुमसे हम अपेक्षा कर रहे थे कि तुम यार हॉलीवुड लेवल का कुछ तो करोगे तुम तो भोजपुरी में भी निकृष्ट लेबल पकड़ लिए । ये अहमद ख़ान, साज़िद फरहाद, टाइप के नकारे आप ही के लिए बैठे रहते हैं क्या चचा ? इन चरसियों के पास कोई काम तो है नहीं आप जैसे मंदबुद्धि को पकड़कर कुछ भी सुना देते हैं और आप मोबाइल के जोक पर हंसने वाले आदमी ! आपको लगता है मास्टर पीस आ गया बे !
जबकि सच यह है कि मास्टरपीस की चाहत में आप हग रहें हैं आज कल । अबे ओ ……च्चा ! काहे काहे तीसरे दिन आ जाते हो मेरी जुबान और दिमाग़ दोनों खराब करने । बेइज्जती होती है हमारी, आपके तगड़े वाले फैन जो रहे हैं । कुछ ख़ुद पर काम कर लीजिये चचा ! भोंडापन बहुत पकाऊ होता है आपने तो पर्सनालिटी भी वही बना ली है । कभी फटा कुत्ते के नोचे जैसा कपडा पहनकर स्टेज पर पहुँच जाते हैं कभी कुछ कभी कुछ ।

